Eid al-Fitr Mubarak!

Eid Mubarak.
रिश्ते न तुमने बनाये
न हमने
ये सब बनाये है उस खुदा ने
जब पैदा हुए तो
कोई भी धर्म न था
ये सब दिया पैदा होने के बाद माँ बाप ने
जो उनका धर्म था वही उन्होंने दिया।
खून का कोई धर्म नहीं होता
आज तक कभी भी किसी भी हॉस्पिटल में जब भी कोई admit होता है तो सिर्फ blood मांगते हैं वो भी group के हिसाब से
कभी भी किसी blood bank ने blood देते वक़्त धर्म नहीं पूछा न ही तुमने हमने बताया
बस मांगा सिर्फ blood।
तो फिर भेदभाव क्यों ?
जब खुदा ने dif नहीं किया तो इंसान क्यों करता है ?
क्या इंसान खुदा खुदा से बढ़कर है ?
क्या इंसान खुदा को कभी भी challenge कर सकता है।
नहीं। कभी नहीं
तो बन जाओ सब एक
बात करो न मजहब की
बात करो सिर्फ इंसानियत की।
आज भी वही पुरानी कहावत अपनाएँ
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब बनकर रहें भाई भाई।
तभी इंसानियत दिखेगी
तभी खुदा भी प्रसन्न होगा
खुदा का एक ही नयम है
इंसानियत मानवता प्रेम प्यार.
हो सके तो रहें प्रेम भाव से
रहें एक जुट रहे एक साथ
न करे बंटवारा किसी का
बस सब में हो सिर्फ
प्यार प्यार और प्यार।
सभी को
ईद मुबारक
Eid Mubarak…..

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